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Sri Yantra – श्री यंत्र

₹101,000.00

श्री यंत्र
घर जाकर हाथों में “प्राण प्रतिष्ठित श्री यंत्र”का भेट l पार्सल सर्विस नहीं होगी क्युकि यह धातु नहीं जीवन का संचार है इनमें श्री साक्षात विराजमान है l
“यथा सूर्यः सर्वलोकप्रकाशकः —
तथा श्री यंत्रं सर्वसिद्धिप्रदं।
जो इस ब्रह्मांड का नाभिक है, वही श्री यंत्र —
जो सृष्टि का रहस्य है, वही त्रिपुरसुंदरी का आसन है।”

श्री यंत्र
घर जाकर हाथों में “प्राण प्रतिष्ठित श्री यंत्र”का भेट l पार्सल सर्विस नहीं होगी क्युकि यह धातु नहीं जीवन का संचार है इनमें श्री साक्षात विराजमान है l
“यथा सूर्यः सर्वलोकप्रकाशकः —
तथा श्री यंत्रं सर्वसिद्धिप्रदं।
जो इस ब्रह्मांड का नाभिक है, वही श्री यंत्र —
जो सृष्टि का रहस्य है, वही त्रिपुरसुंदरी का आसन है।”
प्रिय श्रोता,
आज आप केवल एक पॉडकास्ट नहीं सुन रहे,
आप एक आवाहन सुन रहे हैं —
उस शक्ति का, जो धातु में प्राण फूँककर देवी को स्थूल रूप में स्थापित करती है।
यह केवल एक “यंत्र” नहीं,
यह देवत्व का जड़ में अवतरण है।
यहाँ आज जिस श्री यंत्र की चर्चा होगी,
वह किसी मशीन या ज्यामिति का खेल नहीं —
वह अदृश्य शक्ति का दृश्य स्वरूप है।
यह श्री यंत्र अष्टधातु से निर्मित है —
स्वर्ण, रजत, ताम्र, लोह, सीस, जस्ता, पारा, और टिन —
जिनमें आठ ग्रहों का तेज और पृथ्वी का सार विद्यमान है।
किन्तु आज यह केवल धातु नहीं रहा…
इसमें प्राण प्रतिष्ठा की वेदमयी विधि द्वारा महालक्ष्मी का निवास कराया गया है।
जब यह यंत्र प्रतिष्ठित हुआ,
तो ११ ब्राह्मणों द्वारा ललिता सहस्रनाम, श्रीसूक्त, नवावरण पूजन,
और मूल मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” के साथ
साक्षात् ऊर्जासंचार संस्कार किया गया। हैं
अब यह यंत्र नहीं —
माँ स्वयं हैं। —
जो अंधकार में भी सत्य को देखता है।
वह प्रतीक है विवेक, मौन और अंतर्दृष्टि का।
जिस घर में यह श्री यंत्र प्रतिष्ठित होता है,
वहाँ दरिद्रता का नामोनिशान नहीं टिकता,
क्योंकि लक्ष्मी स्वयं वहाँ निवास करती हैं।
यहाँ एक नियम है —
यह यंत्र किसी को पार्सल द्वारा नहीं भेजा जाएगा।
यह केवल हाथ से, श्रद्धा से, संस्कार से हमारे ब्राह्मण प्रतिनिधि द्वारा आपके घर में मंत्रोच्चार के साथ स्थापित कर माँ का पूजन कर स्थापित कर दिया जाएगा,
क्योंकि अब यह धातु नहीं रहा…
इसमें देवत्व का श्वास प्रविष्ट है
प्रिय श्रोता,
आज के इस दिव्य संवाद में हम जानेंगे —
कि कैसे एक श्री यंत्र में प्राण प्रतिष्ठा होती है,
कैसे देवी उसमें स्वयं निवास करती हैं,
और क्यों यह धन नहीं, साधना है।
यह केवल ₹21,000 का यंत्र नहीं —
यह कर्म, संस्कार और कृपा का संगम है।
भारतभूमि पर केवल 101000 प्राण प्रतिष्ठित श्री यंत्र
स्थापित किए जा रहे हैं —
जिनमें से प्रत्येक देवी की जीवंत उपस्थिति का प्रतीक है।
(🎵 पृष्ठभूमि — शंख, मंद तबला और तंत्री वादन)
तो आइए,
श्रद्धा से बैठिए,
मन को स्थिर कीजिए,
और प्रवेश कीजिए उस दिव्य संसार में
जहाँ धातु से देवी बनती है —
और भक्त का घर मंदिर में परिवर्तित हो जाता है।
“यह है — प्राण प्रतिष्ठित श्री यंत्र
धातु से देवत्व की ओर यात्रा l

“प्राण-प्रतिष्ठित श्री यंत्र” पर २५ प्रश्नोत्तर
१️⃣ प्रश्न:
श्री यंत्र को ‘यंत्र-राज’ क्यों कहा गया है?
उत्तर:
शास्त्रों में कहा गया — “यंत्राणां राजः श्रीचक्रं” — सभी यंत्रों में श्री यंत्र सर्वोपरि है।
यह त्रिपुरसुंदरी का साक्षात् आवास है, जहाँ लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा और शक्तिरूपा चतुर्दश देवियाँ निवास करती हैं।
यह केवल रेखाओं का संयोजन नहीं, वरन् सृष्टि के नाभिकीय संतुलन का दिव्य प्रतीक है।
२️⃣ प्रश्न:
क्या श्री यंत्र में वास्तव में “प्राण प्रतिष्ठा” संभव है?
उत्तर:
हाँ, जब यंत्र में सप्तशती पाठ, नवावरण पूजन, मूल मंत्र जप, और बीजाक्षर न्यास द्वारा प्राण-संस्कार किया जाता है, तब धातु निर्जीव नहीं रहती।
वह दैवीय चेतना का आसन बन जाती है — जैसे पत्थर प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात् भगवान बन जाता है। यह 1250000 मंत्रों से प्रतिष्ठित हैं l
३️⃣ प्रश्न:
इस विशेष श्री यंत्र की प्रतिष्ठा कैसे की गई है?
उत्तर:
वेदोक्त ललिता सहस्रनाम, श्रीसूक्त, लक्ष्मी तंत्र तथा रुद्राभिषेक विधि से नव-दिवसीय अनुष्ठान द्वारा इसमें प्राण संचार हुआ है।
साक्षात् ब्रह्मवेत्ता आचार्यों द्वारा “हृदयं तस्मिन् निविशति” मंत्रोच्चार से देवी महालक्ष्मी का आवाहन किया गया है।
४️⃣ प्रश्न:
इस श्री यंत्र में देवी लक्ष्मी जी उल्लू पर सवार क्यों हैं?
उत्तर:
उल्लू यहाँ ज्ञान और गुप्त दृष्टि का प्रतीक है।
जो व्यक्ति लक्ष्मी का साक्षात्कार करता है, उसके लिए रात्रि भी प्रकाश हो जाती है।
देवी का उल्लू पर विराजना यह दर्शाता है कि धन वहीं टिकता है जहाँ विवेक और मौन का राज्य है।
५️⃣ प्रश्न:
अष्टधातु से निर्मित यंत्र की क्या विशेषता है?
उत्तर:
अष्टधातु — स्वर्ण, रजत, ताम्र, लोह, सीस, जस्ता, पारा और टिन — इनका योग पृथ्वी के आठ तत्वों का प्रतिनिधि है।
इनमें से प्रत्येक धातु एक ग्रह से जुड़ी होती है, अतः यंत्र में संपूर्ण ग्रह-संतुलन की शक्ति समाहित होती है।
६️⃣ प्रश्न:
यह यंत्र केवल धातु क्यों नहीं रहा?
उत्तर:
क्योंकि इसमें देवत्व का संचार हो चुका है।
अब यह “वस्तु” नहीं, बल्कि देवी की उपस्थिति है।
इसी कारण इसे हाथ से ही सुपुर्द किया जाता है — पार्सल नहीं, संस्कारित स्पर्श से प्रेषित आशीर्वाद।
७️⃣ प्रश्न:
क्या इस श्री यंत्र को घर में रखना सुरक्षित है?
उत्तर:
सर्वथा। यह मंगलकारक है।
जहाँ श्री यंत्र प्रतिष्ठित होता है, वहाँ वास्तु दोष, दरिद्रता, और ग्रह क्लेश स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
देवी लक्ष्मी के पदचिह्न वहाँ स्थायी होते हैं।
८️⃣ प्रश्न:
श्री यंत्र की स्थापना का उत्तम स्थान कौन-सा है?
उत्तर:
पूर्वाभिमुख पूजाघर, अथवा उत्तर-पूर्व कोण (ईशान कोण) सर्वोत्तम है।
मंगलवार या शुक्रवार, प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या संध्या बेला — दोनों काल शुभ हैं।
९️⃣ प्रश्न:
इस श्री यंत्र का पूजन कैसे किया जाए?
उत्तर:
प्रत्येक शुक्रवार को दीपक जलाकर श्रीसूक्त अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
थोड़ी सी केसर-युक्त जल से अर्घ्य देकर “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का 108 बार जप करें।
🔟 प्रश्न:
क्या इसे सभी जाति, धर्म या वर्ण के लोग रख सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि यह शक्ति का सर्वमान्य स्वरूप है।
लक्ष्मी किसी एक मत की नहीं — वह विश्व की मातृ शक्ति हैं।
११️⃣ प्रश्न:
₹21,000 की राशि क्या अधिक नहीं है?
उत्तर:
नहीं। यह खरीद नहीं, आह्वान है।
यह यंत्र नहीं, “देवी का निवास” है।
भक्त यह राशि “दान” स्वरूप अर्पित करता है — जिससे यंत्र का पूजन, अभिषेक, और प्रसाद व्यवस्था संपन्न हो सके।
देवी इस माध्यम से भक्त का कर्म-संतुलन करती हैं।
१२️⃣ प्रश्न:
क्यों 111000 श्री यंत्र ही प्रतिष्ठित किए गए हैं?
उत्तर:
संख्या ११ का अर्थ है एकता और पूर्णता।
१०० से गुणित होने पर यह सहस्रगुणा सिद्धि को प्रकट करती है।
ये 111000 यंत्र सिद्ध यंत्रों की संघ शक्ति बनकर भारतभूमि में धन, धर्म और सद्भाव का बीज बोएँगे।
१३️⃣ प्रश्न:
क्या यह यंत्र केवल लक्ष्मी प्राप्ति के लिए है?
उत्तर:
नहीं, यह लक्ष्मी-सद्बुद्धि-सौभाग्य-शांति-संतान-सफलता — इन सभी का मूल है।
क्योंकि लक्ष्मी केवल धन नहीं — संपन्नता और संतुलन की अधिष्ठात्री हैं।
१४️⃣ प्रश्न:
श्री यंत्र का प्रभाव कब से दिखने लगता है?
उत्तर:
आमतौर पर ४० दिनों के भीतर सूक्ष्म परिवर्तन प्रारंभ होते हैं — व्यवसाय में वृद्धि, घर में शांति, मानसिक स्थिरता।
यह देवी की कृपा का संकेत है, न कि जादू।
१५️⃣ प्रश्न:
क्या इसे बिना दीक्षा के भी रखा जा सकता है?
उत्तर:
हाँ। यह संस्कारित यंत्र है — अतः इसे स्वयं धारण करने से पूर्व दीक्षा आवश्यक नहीं।
प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है, इसलिए देवी स्वयं रक्षक बनकर निवास करती हैं।
१६️⃣ प्रश्न:
इस यंत्र के साथ क्या-क्या सामग्री दी जाएगी?
उत्तर:
शुद्ध रोली, चावल, सुगंधित अत्तर, पंचमेवा, कलावा, लक्ष्मी मुद्रा, कमल पुष्प, रेशमी आसन और एक पूजन पुस्तिका साथ दी जाएगी।
परंतु श्री यंत्र स्वयं हाथ से ही प्रदान किया जाएगा।
१७️⃣ प्रश्न:
क्या इस यंत्र का अनुष्ठान पुनः कराना आवश्यक है?
उत्तर:
नहीं।
एक बार जब देवी का प्राण स्थापित हो गया, तब वह नित्य जीवंत रहती हैं।
बस श्रद्धा से उनका पूजन और स्वच्छता बनाए रखना पर्याप्त है।
१८️⃣ प्रश्न:
इस यंत्र को हाथ से देने का धार्मिक कारण क्या है?
उत्तर:
क्योंकि “प्राण” का संचार स्पर्श से ही संचरित होता है।
जैसे गुरुदेव शिष्य को दीक्षा स्पर्श से देते हैं, वैसे ही यह यंत्र भक्त को संस्कार-शक्ति के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
१९️⃣ प्रश्न:
क्या श्री यंत्र रखने से नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट हो जाती हैं?
उत्तर:
निश्चित रूप से।
यह शक्ति-चक्र इतना प्रभावी है कि भूत-प्रेत, दृष्टि दोष, व्यापारिक अड़चनें और मानसिक भय दूर हो जाते हैं।
देवी के मंत्र-बल से स्थान पवित्र होता है।
२०️⃣ प्रश्न:
क्या यह यंत्र व्यापार में लाभ दे सकता है?
उत्तर:
हाँ।
जिन स्थलों पर यह यंत्र प्रतिष्ठित होता है, वहाँ निरंतर धन प्रवाह, ग्राहकी, और ऋण मुक्ति का प्रभाव देखा गया है।
क्योंकि लक्ष्मी सद्गति और प्रवाह की अधिष्ठात्री हैं।
२१️⃣ प्रश्न:
क्या इसे किसी मंदिर या प्रतिष्ठान में भी स्थापित किया जा सकता है?
उत्तर:
हाँ।
व्यवसायिक प्रतिष्ठान, विद्यालय, या ट्रस्ट कार्यालय — सभी में यह अन्नपूर्णा ऊर्जा का प्रसारक बनता है।
यह केवल घर तक सीमित नहीं।
२२️⃣ प्रश्न:
श्री यंत्र का आकार और स्वरूप क्या है?
उत्तर:
यह अष्टधातु का त्रिविमीय चक्राकार श्रीचक्र है — जिसकी ऊँचाई लगभग ३ इंच और आधार ४ इंच है।
इसमें ऊर्ध्वमुख त्रिकोण शक्ति और अधोमुख त्रिकोण शिव का संगम है — यही “शिव-शक्ति एकत्व” है।
२३️⃣ प्रश्न:
क्या इस यंत्र को स्पर्श करना उचित है?
उत्तर:
केवल स्नान के पश्चात्, शुद्ध वस्त्र में, दाहिने हाथ से स्पर्श करें।
अन्यथा दूरी बनाए रखें।
यह “देवी का जीवंत शरीर” है, सामान्य वस्तु नहीं।
२४️⃣ प्रश्न:
देवी की कृपा के संकेत कैसे जानें?
उत्तर:
यदि घर में अचानक शांति, प्रसन्नता, अनपेक्षित आर्थिक सहयोग, या उज्ज्वल स्वप्न दिखें — तो यह देवी का संकेत है।
वह बताती हैं — “मैं आ गई हूँ।”
२५️⃣ प्रश्न:
अंततः — क्यों इस यंत्र को अपनाना चाहिए?
उत्तर:
क्योंकि यह धन का नहीं, दर्शन का माध्यम है।
जो व्यक्ति श्री यंत्र को हृदय से अपनाता है, वह लक्ष्मी नहीं मांगता — लक्ष्मी स्वयं उसके पास ठहर जाती हैं।
यह ₹21,000 का यंत्र नहीं — यह जीवन में शाश्वत ऊर्जा का आवाहन है।
Q: “QR Verification Video” का क्या महत्व है?
A: यह पारदर्शिता और आस्था दोनों को जोड़ता है — ग्राहक देख सकता है उसका यंत्र कब, कहाँ और किसने सिद्ध किया।
🧿 26
Q: “Mini Puja Kit” क्यों दी जाती है?
A: ताकि ग्राहक अपने यंत्र से रिश्ता बनाए — रोली, चंदन, गंगा जल उसी ऊर्जा को पुनः जगाते हैं।
🧿 27
Q: क्या यंत्र को उपहार में देना शुभ होता है?
A: यह सबसे श्रेष्ठ उपहार है — “ऊर्जा का आशीर्वाद” जो कभी खत्म नहीं होता।
🌺 समापन संदेश l
“भक्त वह नहीं जो माँगता है,
भक्त वह है जो देवी को स्थान देता है।
यह श्री यंत्र नहीं, श्री का साक्षात् रूप है —
धातु से देवत्व की ओर यात्रा का प्रतीक।

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